पुस्तक ही है ईश्वर
पुस्तक ही है ईश्वर, ज्ञान की रोशनी लाए,
अंधेरे मन के भीतर, उजियारा भर जाए।
पढ़ते-पढ़ते धीरे-धीरे, बुद्धि खिलती जाए,
जीवन की हर राह में, सही दिशा दिखाए।
अक्षर मिलकर शब्द बने, शब्दों से बात बने,
सीख की छोटी-छोटी बातें, जीवन की सौगात बने।
नए-नए अर्थों से ये, आगे बढ़ना सिखाए,
झुककर जो पढ़ता है, वो सिर ऊँचा उठाए।
पुस्तकों में छिपा हुआ, हम सबका ये प्यार,
हर पन्ने से मिलता है, ज्ञान का उपहार।
कविता, कहानी, शब्दों में, मन खो सा जाता है,
सच्चे जीवन का रास्ता, यहीं समझ में आता है।
— @हनीबिंदु
22.04.2026
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